साल 1939 में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित यह क्लब 1943 से कनॉट प्लेस के मौजूदा परिसर में संचालित हो रहा है। यह केरल राज्य के गठन से भी पहले अस्तित्व में आया था और लंबे समय से दिल्ली में मलयाली समुदाय का प्रमुख सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र रहा है।
क्लब का कहना है कि पहले भी उसे परिसर खाली करने का नोटिस मिला था, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के बाद वह वहीं संचालित होता रहा। उस दौरान अदालत ने बढ़ा हुआ किराया देने का निर्देश दिया था। क्लब के अध्यक्ष के अनुसार, उन्होंने संशोधित किराया देने पर सहमति जताई, लेकिन मकान मालिक ने राशि लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद कानूनी सलाह के अनुसार, क्लब ने वह राशि मकान मालिक के नाम से फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा करनी शुरू कर दी।
क्लब के सदस्यों का कहना है कि यह केवल एक इमारत नहीं, बल्कि दिल्ली में रहने वाले मलयाली समुदाय की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। उनका मानना है कि किसी गैर-व्यावसायिक सांस्कृतिक संस्था के लिए कनॉट प्लेस जैसी ऐतिहासिक जगह छोड़ना आसान नहीं होगा।
क्लब प्रबंधन ने कहा है कि वह अदालत में अपनी कानूनी लड़ाई जारी रखेगा और इस मुद्दे पर केरल तथा दिल्ली सरकार से भी सहयोग मांगेगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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