राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बकरी के दूध, नीम, एलोवेरा, हल्दी, चंदन और मोरिंगा जैसे प्राकृतिक अवयवों से हर्बल साबुन तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की स्थानीय बाजार के साथ-साथ अन्य क्षेत्रों में भी मांग बढ़ रही है।
सरकार के अनुसार, इस मॉडल का एक उदाहरण सोनभद्र जिले के रॉबर्ट्सगंज विकासखंड के साजौर गांव का बजरंगबली स्वयं सहायता समूह है। समूह से जुड़ी 10 से अधिक महिलाएं नियमित रूप से हर्बल साबुन का उत्पादन कर रही हैं और हर महीने 50 से 60 हजार रुपये तक के उत्पाद बेच रही हैं। इससे प्रत्येक महिला को 8 से 10 हजार रुपये प्रतिमाह अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
हर्बल साबुन में इस्तेमाल होने वाले प्राकृतिक तत्वों के कारण इन उत्पादों को त्वचा के लिए सुरक्षित और उपयोगी विकल्प के रूप में पहचान मिल रही है। सरकार का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक उत्पादों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित हो रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत स्वयं सहायता समूहों को प्रशिक्षण, उत्पादन, पैकेजिंग और विपणन की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाना, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और 'जंगल से बाजार' की अवधारणा को मजबूत करना है।
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