कांवड़ यात्रा में शामिल महिला श्रद्धालु सरोज ने बताया कि पहले रात में यात्रा के दौरान रुकने में डर लगता था, लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होने से महिलाएं निडर होकर यात्रा कर रही हैं और रास्ते में रात्रि विश्राम करने में भी सहज महसूस करती हैं।
पहली बार कांवड़ यात्रा पर आईं श्रद्धालु रानी ने भी सरकार की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा का माहौल पहले से अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित है।
वहीं, पिछले 32 वर्षों से कांवड़ मार्ग पर शिविर लगाने वाले आयोजक ललित का कहना है कि इस बार महिलाओं और बच्चों की भागीदारी पहले की तुलना में काफी अधिक है। उनके अनुसार, महिलाओं में बढ़ी सुरक्षा की भावना इस बदलाव की प्रमुख वजह है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी यह संकेत देती है कि सदियों पुरानी कांवड़ यात्रा अब अधिक समावेशी स्वरूप ले रही है, जहां बेहतर सुरक्षा और सुविधाओं के चलते महिलाएं भी बड़ी संख्या में आस्था के इस महापर्व का हिस्सा बन रही हैं।
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