अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए प्रदेश में राज्य, मंडल, जनपद और तहसील स्तर पर चार स्तरीय एंटी भू-माफिया टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इनका काम अवैध कब्जों की पहचान करने से लेकर जमीन को कब्जामुक्त कराने और संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने तक है।
शिकायतों की ऑनलाइन निगरानी के लिए एंटी भू-माफिया पोर्टल भी बनाया गया है। इस पोर्टल पर अब तक अवैध कब्जे से जुड़ी 4,34,016 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से 4,31,697 शिकायतों यानी 99 प्रतिशत से ज्यादा का निस्तारण किया जा चुका है। फिलहाल 2,319 शिकायतें लंबित हैं।
सरकार के मुताबिक अभियान के दौरान सिर्फ जमीन खाली कराने तक कार्रवाई सीमित नहीं रही, बल्कि भूमाफियाओं पर कानूनी शिकंजा भी कसा गया। अब तक 25,068 राजस्व वाद, 1,168 सिविल वाद और 4,751 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। वहीं 1,413 अतिक्रमणकर्ताओं को भूमाफिया के रूप में चिह्नित किया गया है, जिनमें से 144 इस समय जेल में हैं।
अलग-अलग कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई है। भारतीय दंड संहिता के तहत 1,621 मामले दर्ज किए गए। दंड प्रक्रिया संहिता के तहत 109 लोगों पर कार्रवाई हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत 3, गैंगस्टर एक्ट के तहत 70 और गुंडा एक्ट के तहत 206 लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई। इसके अलावा अन्य धाराओं के तहत 1,745 लोगों पर कार्रवाई की गई है।
अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई 84,005 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन अब प्रदेश के लिए बड़े लैंडबैंक के तौर पर काम आ सकती है। सरकार इस जमीन का इस्तेमाल औद्योगिक निवेश, बुनियादी ढांचे और बड़े विकास प्रोजेक्ट्स के लिए कर सकती है।
कब्जामुक्त जमीन पर उद्योग, फार्मास्युटिकल और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां, लॉजिस्टिक पार्क, विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेज और अन्य बड़े निवेश प्रोजेक्ट स्थापित किए जा सकते हैं। इससे निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराने में तेजी आएगी और नए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
एंटी भूमाफिया अभियान के आंकड़े बताते हैं कि योगी सरकार ने सार्वजनिक जमीनों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के साथ-साथ शिकायतों की ऑनलाइन निगरानी और भूमाफियाओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी तंत्र मजबूत किया है। सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश में विकास परियोजनाओं के लिए जमीन की उपलब्धता बढ़ेगी और औद्योगिक निवेश को भी गति मिलेगी।
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