उन्होंने कहा, 'इसका (मजबूती का) मतलब बस यह नहीं है कि हम सिर्फ विलय और अधिग्रहण के दायरे में ही सोच रहे हैं। कृपया ऐसा नहीं समझें।' उन्होंने कहा, 'यदि हमें बैंकों की अच्छी तरह से मदद करनी है कि यदि बैंकों को पूरक भूमिका अदा करनी है तो क्या हम कुछ अन्य ढांचों के बारे में सोच सकते हैं जिसके जरिए बैंकों को अपना काम चलाना आसान हो सकता है। साथ ही उन्हें बाजार से आसानी से पूंजी मिले और उनके लिए अपनी बैलेंस शीट सुधारना आसान हो।'
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पुनर्गठन काफी समय से लंबित है और कई छोटे बैंकों के विलय की सिफारिश के संबंध में आई रिपोर्टों के बावजूद कोई प्रगति नहीं हुई है। सार्वजनिक क्षेत्र के 27 बैंक हैं, जिनमें भारतीय स्टेट बैंक के पांच सहायक बैंक शामिल हैं। बैंक और वित्तीय संस्थाओं के दो दिन के सम्मेलन 'ज्ञान संगम' के पहले दिन उन्होंने कहा 'ये प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर यह समूह विचार करेगा और इसकी वजह ढूंढेगा।'
Digital Desk: Shiv Kishor
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