रेलवे में रिफॉर्म की ओर बड़ा कदम उठाते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु के निर्देश पर टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह बदल दी गई है। खुद रेल मंत्री ने अपने उस अधिकार को भी छोड़ दिया है, जिसके तहत ज्यादा लागत वाले टेंडरों को मंत्री लेवल पर ही मंजूरी मिलती थी। अब जनरल मैनेजरों और रेलवे प्रोडक्शन यूनिटों के डीजी को टेंडर मंजूर करने की पूरी जिम्मेदारी सौंप दी गई है। रेलवे बोर्ड का कहना है कि टेंडरों को मंजूरी के लिए रेलवे बोर्ड तक भेजने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। टेंडर जितनी जल्दी पास होंगे, प्रोजेक्ट उतनी तेजी से पूरा होगा। 500 करोड़ रुपये तक के टेंडरों को कमिटी से संबंधित इग्जेक्यूटिव डायरेक्टर और अडिशनल मेंबर के स्तर पर ही मंजूर किया जाएगा।
Digital Desk: Kamal
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