कम से कम 500 कंपनियों ने श्रम मंत्रालय का दरवाजा खटखटाया है। वे चाहती हैं कि मंत्रालय उन कानूनों पर विचार करे, जो वेतन भुगतान को नियंत्रित करते हैं। साथ ही, कर्मचारियों को एक विकल्प मिले कि उनके वेतन उन्हें कैसे मिलें। मानव संसाधन कंसल्टेंसी फर्म टीम लीज ने बताया कि 500 नियोक्ताओं के समूह ने हाल ही में सरकार को एक याचिका सौंपी है। उन्होंने इसमें आग्रह किया है कि कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों के वेतन भुगतान संबंधी कानूनों पर दोबारा विचार किया जाए। कर्मचारियों को यह चुनने की आजादी मिले कि उन्हें कैसे तनख्वाह चाहिए और उनके अंशदान का निवेश कैसे हो। तीन मामलों पर फैसला करने की खातिर कर्मचारियों को विकल्प देने को कहा गया है। पहला, कर्मचारियों के 12 फीसद अंशदान को भविष्य निधि में रखना है या नहीं। नियोक्ता के 12 फीसद अंशदान को कर्मचारी पेंशन स्कीम में भुगतान किया जाना है या नेशनल पेंशन स्कीम के तहत खोले गए निजी खाते में राशि जाए। तीसरा, कर्मचारियों के ईएसआइ अंशदान को ईएसआइ कॉरपोरेशन में डाला जाए या बीमा नियामक इरडा के नियंत्रण वाली किसी बीमा कंपनी से बीमा खरीदा जाए।
Digital Desk: Kamal
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