7,000 करोड़ रुपये की बिजली पारेषण परियोजनाएं अटकी
(India) सूत्रों ने कहा कि सामान्य रूप से कंपनियों को पारेषण परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में करीब 36 से 50 महीने का समय लगता है। इसमें से 24 महीने का समय वन्य जीव मंजूरी हासिल करने में लग जाता है। इन पांच परियोजनाओं में ग्वालियर (मध्य प्रदेश) से जयपुर (राजस्थान) की प्रस्तावित पारेषण लाइन शामिल है। इसमें वन्य जीव अभयारण्य का मामला जुड़ा है। एक अन्य ग्वालियर से जयपुर पारेषण लाइन को भी वन्य जीव मंजूरी की प्रतीक्षा है। उसके बाद वन मंजूरी के लिए उच्चतम न्यायालय से मंजूरी लेनी होगी। पुनातसांगचु (भूटान) - अलीपुरदुआर (पश्चिम बंगाल) तथा पुनातसांगचु-1-अलीपुरदुआर परियोजनाओं के रास्ते में भी वन्य जीव क्षेत्र है और मामले को विचार के लिये राज्य वन्यजीव बोर्ड के पास भेजा जाएगा। इसके अलावा मध्य प्रदेश के खारमोर वन्य जीव अभयारण्य के रास्ते गुजरने वाली राजगढ़-करमसाड पारेषण लाइन को भी मंजूरी का इंतजार है।

Digital Desk: Shiv Kishor

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