दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की तूफानी जीत से आर्थिक सुधारों की रफ्तार धीमी हो सकती है। मोदी सरकार इस दिशा में आगामी बजट में लोक लुभावन योजनाओं और कार्यक्रमों पर ध्यान केन्द्रित कर सकती है। लेकिन इसमें वित्तीय घाटे को नियंत्रित रखना कड़ी चुनौती साबित होगा। पिछले लगभग नौ महीनो में मोदी सरकार ने विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आकर्षित करने के लिए आर्थिक सुधारों के तहत कई ऐसे कदम उठाए है। जिनका श्रमिक, किसान और अन्य संगठनों ने कड़ा विरोध किया है। इनमें भूमि अधिग्रहण अध्यादेश और श्रम सुधारों के नाम पर नियोक्ताओं की दी गई ढील शामिल है। विदेशी प्रत्यक्ष निवेश के लिए सरकारी कंपनियों में विनिवेश में भी तेजी लाई गई है। इसका विरोध करते हुए लगभग चार दशक के बाद खनन श्रमिकों ने देशव्यापी हड़ताल की थी। वहीं बैंक और बिजली श्रमिक संगठनों ने इसका समर्थन किया।
Digital Desk: Kamal
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