भारतीय रिजर्व बैंक आज वित्त वर्ष 2015-16 की प्रथम द्विमाही मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा करेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि रेपो दर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि रेपो दर वह दर है, जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को छोटी अवधि के लिए कर्ज देता है. आरबीआई अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा जून में संभावित ब्याज दर वृद्धि के प्रभाव पर भी गौर करेगा. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने कहा है कि रिजर्व बैंक की अगली समीक्षा में दर में की जाने वाली कटौती विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के लिए काफी नहीं होगी, क्योंकि मांग की स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है.गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ने जनवरी-मार्च तिमाही में नियत समय से हटते हुए दो बार रेपो दर में कटौती की है, जिसके बाद यह अभी 7.5 फीसदी है. आरबीआई के गवर्नर रघुराम राजन ने जनवरी में दर कटौती करते हुए कहा था, ष्आगे की कटौती महंगाई कम होने की पुष्टि करने वाले आंकड़े और वित्तीय घाटा कम करने के कार्यक्रमों की गुणवत्ता पर निर्भर करेगी.ष् आरबीआई आज वित्त वर्ष 2015-16 के पहले दो महीने के लिए क्रेडिट पॉलिसी का एलान करेगा, रेपो रेट और रिवर्स रेट घटने की उम्मीद कम आरबीआई अगर रेपो रेट घटाने का एलान करेगा तो बैंकों पर कर्ज दरें घटाने का दबाव होगा, जिससे आपकी ईएमआई कम होगी, अभी रेपो रेट 7.5 फीसदी है.जानकारों के मुताबिक आरबीआई अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से जून में संभावित ब्याज दर बढ़ाने के असर पर गौर करेगा इसके अलावा अप्रैल के महंगाई आंकड़ों को ध्यान में रखकर होगा एलानरिजर्व बैंक ने जनवरी-मार्च तिमाही में दो बार रेपो दर में कटौती की है, लेकिन ज्यादातर बैंकों ने ब्याज दरें नहीं घटाई हैं.
Digital Desk: Kamal
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