दूरसंचार मंत्रालय ने नई लाइसेंसिंग व्यवस्था के तहत मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो इंफोकॉम को वॉयस कॉलिंग सेवा कारोबार की अनुमति देकर कंपनी को 3,367.29 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया है। शुक्रवार को संसद में पेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसके लिए मंत्रालय की खिंचाई की गई है। रिपोर्ट में विभाग पर भारती एयरटेल को भी 499 करोड़ रुपये को भी ऐसा ही फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। एयरटेल को यह लाभ चेन्नई मेट्रो और तमिलनाडु सर्किल के विलय की वजह से हुआ। रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआइएल) ने वर्ष 2010 में इंफोटेल ब्रॉडबैंड का अधिग्रहण किया था। बाद में इंफोटेल का नाम बदलकर रिलायंस जियो इंफोकॉम कर दिया गया। इससे पहले इंफोटेल ने स्पेक्ट्रम नीलामी में समूचे देश में ब्रॉडबैंड सेवा के लिए ब्राडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए) स्पेक्ट्रम हासिल किया था। इसका उपयोग 4जी मोबाइल सेवाओं के लिए किया जा सकता है।
Digital Desk: Kamal
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