बैंकों को मजबूरन घटानी पड़ेंगी ब्याज दरें
(India)

निकट भविष्य में बैंकों को मजबूरन ब्याज दरें घटानी पड़ेंगी। कर्ज की मांग बढ़ाने के लिए उनके पास कोई दूसरा उपाय नहीं है। घरेलू रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के विश्लेषकों का कहना है कि मजबूरी में ही सही, लेकिन कॉमर्शियल बैंक ग्राहकों को ब्याज दरों में ज्यादा राहत देंगे। एजेंसी की तरफ से मंगलवार को एक रिपोर्ट जारी की गई। इसमें बैंकों की एसेट क्वालिटी को लेकर चिंता भी जताई गई है। रिजर्व बैंक ने इस साल जनवरी से लेकर अब तक दो बार में रेपो रेट को 0.50 फीसद घटाया है। फिलहाल, बैंकों ने अब तक इसका पूरा फायदा ग्राहकों को नहीं दिया है। उनका कहना है कि फंड की लागत अधिक होने के कारण ऐसा कर पाना संभव नहीं है। क्रिसिल के डायरेक्टर रजत बहल ने कहा कि नए कर्ज की मांग कम हो गई है। ऐसे में क्रेडिट ग्रोथ बढ़ाने के लिए बैंकों को नीतिगत ब्याज दरों में की गई कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों को देना ही होगा। घरेलू बैंक फंसे कर्ज की परेशानी से उबरने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।

Digital Desk: Kamal

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