विदेशी संस्थागत निवेशकों से जुड़े न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स (मैट) के सभी पुराने विवादित मामलों न्यायमूर्ति शाह समिति गौर करेगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने विभिन्न कर मामलों में विवाद के लिए परस्पर विरोधी न्यायिक फैसलों को दोषी बताए हुए कहा कि इससे विदेशी निवेशक नाराज हुए हैं। जेटली के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने साल 2012 में अथॉरिटी ऑफ एडवांस रूलिंग का दरवाजा खटखटाकर खुद ही मैट को न्योता दे डाला। उसके बाद से यह मामला न्यायपालिका में अटका है। ऐसे में सरकार उन्हें कोई छूट नहीं दे सकती। जेटली ने कहा, ‘हमने एक ही काम किया है कि भविष्य में मैट से छूट दे दी है। अतीत में जो हुआ वह हमने नहीं किया है। आप टिब्यूनल में जाते हैं। अपने खिलाफ फैसला आमंत्रित करते हैं। यदि 2012 का फैसला नहीं आता, तो 2010 का फैसला बरकरार रहता। साल 2010 में एएआर ने निर्णय दिया था कि उन विदेशी कंपनियों पर मैट लागू नहीं होता, जिनके दफ्तर भारत में नहीं हैं।
Digital Desk: Kamal
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