वित्तीय क्षेत्र में सुधार के तहत केंद्र सरकार ने गुरुवार को इंडियन फाइनेंशियल कोड (आईएफसी) का संशोधित मसौदा जारी किया। इस मसौदे के लागू होने के बाद आरबीआई गवर्नर के अधिकार काफी कम जाएंगे। इसमें प्रमुख पॉलिसी रेट्स बहुमत के आधार पर तय करने का प्रस्ताव है, जिससे इस मामले में गवर्नर का वीटो का अधिकार खत्म हो जाएगा। वर्तमान व्यवस्था के तहत आरबीआई गवर्नर तकनीकी सलाहकार समिति (टीएसी) से सलाह-मशविरा के बाद रेट्स तय करते हैं, लेकिन इसमें बहुमत की राय गर्वनर के लिए बाध्यकारी नहीं है। कई बार सलाहकार समिति की राय से अलग गवर्नर अपने विवेक से फैसला करते हैं। अब आईएफसी के संशोधित मसौदे के मुताबिक आरबीआई को सरकार द्वारा केंद्रीय बैंक से परामर्श के बाद हर तीन साल में तय किए जाने वाले सालाना खुदरा महंगाई के लक्ष्य को ध्यान में रखना होगा। वित्त मंत्रालय ने अपने मसौदे में कहा, ‘केंद्र सरकार द्वारा तीन साल में आरबीआई के साथ परामर्श से हर वित्त वर्ष के लिए महंगाई लक्ष्य को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स के आधार पर तय किया जाएगा।’
Digital Desk: Kamal
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