आम लोगों के लिए भारतीय वित्त संहिता के संशोधित मसौदे को जारी किए जाने के महज कुछ सप्ताह बाद वित्त सचिव राजीव महर्षि ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि ब्याज दरों को लेकर निर्णय लेने के संबंध में आरबीआई गवर्नर के अधिकारों को नियंत्रित करने का केंद्र सरकार का कोई इरादा नहीं था। जल्दबाजी में आयोजित किए गए एक संवाददाता सम्मेलन में महर्षि ने कहा कि मीडिया इस मामले को लेकर गुमराह कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि संशोधित मसौदा सरकार के नजरिये का सही रूप से प्रतिनिधित्व करे। संशोधित मसौदा आईएफसी, जिसे उन्होंने आईएफसी 1.1 का नाम दिया है, सरकार के लिए अभी भी महज एक चर्चा पत्र के बराबर है।महर्षि ने कहा कि सरकार के निर्णायक रुख का खुलासा संसद में पेश किए जाते वक्त मसौदा विधेयक में किया जाएगा।
Digital Desk: Kamal
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