लगातार नवें महीने थोक महंगाई की दर के शून्य से नीचे बने रहने के बाद अब रिजर्व बैंक (आरबीआइ) पर ब्याज दरों को घटाने का दबाव बढ़ गया है। जुलाई में थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित महंगाई की दर एतिहासिक तौर पर शून्य से 4.05 फीसद नीचे चली गई है। महंगाई की दर में यह कमी सब्जियों और ईंधन के थोक मूल्यों में तेज गिरावट की वजह से हुई है। महंगाई की चिंता से ब्याज दरों में कमी से बचता रहा रिजर्व बैंक 29 सितंबर को कर्ज नीति की समीक्षा में इस दिशा में विचार कर सकता है। थोक महंगाई से पहले इसी सप्ताह आए आंकड़ों के मुताबिक, खुदरा महंगाई की दर में भी जुलाई में तेज कमी दर्ज की गई थी। यह अब तक के रिकॉर्ड निचले स्तर 3.78 फीसद पर रही। जून में थोक मूल्यों पर आधारित महंगाई की दर शून्य से 2.40 फीसद नीचे थी। थोक मूल्यों वाली यह दर पिछले साल नवंबर से नकारात्मक बनी हुई है। सब्जियों की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है।
Digital Desk: Kamal
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