वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राजकोषीय घाटे को लेकर कोई चिंता का कारण नहीं है और सरकार विनिवेश के मोर्चे पर कुछ कठिनाई के बावजूद घाटे को सीमित रखने के निर्धारित लक्ष्य हासिल कर लेगी। उन्होंने यह भी कहा कि संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पारित करने के लिए विपक्ष को राजी करने की पूरी कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के नियमों को और आसान बनाने में लगी है और ऐसी शर्तों को खत्म किया जा रहा है जिनकी आज के परिप्रेक्ष्य में जरुरत नहीं रह गयी है। राजकोषीय घाटे के संबंध में उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता है कि कोई चिंता की बात है, मैंने जानबूझकर राजकोषीय घाटे का लक्ष्य बहुत हल्का रखा था जो 4.1 प्रतिशत घट कर चार प्रतिशत हो गया और (2015-16) के लिए 3.9 प्रतिशत रखा गया है। कर राजस्व और व्यय की चाल को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि कोई दिक्कत होगी।
Digital Desk: Kamal
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