1992 में स्टॉक मार्केट घोटाले में दो बैंकरों को सजा
(India)
एक विशेष अदालत ने 1992 के हर्षद मेहता स्टॉक मार्केट घोटाले में धोखाधड़ी, सरकारी धन की गड़बड़ी और आपराधिक विश्वासघात के जुर्म में दो पूर्व बैंक अधिकारियों को दोषी करार दिया और उन्हें चार साल सश्रम कारावास तथा पांच-पांच करोड़ रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। अदालत ने कहा कि आरोपियों के कारनामों को राष्ट्र-विरोधी कहा जा सकता है। प्रतिभूति लेन-देन कानून से जुड़े अपराधों में मुकदमा चलाने के लिए गठित एक विशेष अदालत की अध्यक्षता करते हुए न्यायमूर्ति रोशन दलवी ने 29 अक्तूबर को स्टेट बैंक ऑफ सौराष्ट्र (एसबीएस) के कोष प्रबंधन प्रकोष्ठ (एफएमसी) के तत्कालीन मुख्य प्रबंधक एम एस श्रीनिवासन और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) के प्रतिभूति संभाग में तत्कालीन बैंकिंग अधिकारी आर सीतारमण को दोषी करार दिया। अदालत ने दोषियों को चार साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई और उन्हें पांच-पांच करोड़ रुपए जुर्माने के तौर पर देने का आदेश भी दिया। श्रीनिवासन और सीतारमण को दोषी करार देते हुए अदालत ने कहा कि दोनों ने लोक सेवक के तौर पर अपने पदों का दुरुपयोग करते हुए एसबीएस और एसबीआई को कई करोड़ रुपए का चूना लगाया और सरकारी खजाने के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। न्यायमूर्ति दलवी ने कहा कि इस मामले में पीड़ित, शिकायतकर्ता और आरोप लगाने वाला यह देश है। सरकारी वित्तीय संस्थानों के खजाने का सफाया किया गया। उन्होंने कहा, उन्होंने (श्रीनिवासन और सीतारमण ने) अवैध एवं आपराधिक हितों की पूर्ति के लिए सरकारी संपत्ति की गड़बड़ी कर खुद को गिरा लिया जिससे सरकारी खजाने को बड़े पैमाने पर मौद्रिक नुकसान हुआ। उनके कारनामे राष्ट्र-विरोधी कहे जा सकते हैं क्योंकि ऐसे कारनामों के कारण देश पर वित्तीय दबाव बहुत बढ़ा और 1992 का घोटाला हुआ। न्यायमूर्ति दलवी ने कहा कि आरोपियों ने न केवल खुद को भ्रष्ट बनाया बल्कि देश का भी बड़ा नुकसान किया।

Digital Desk: Kamal

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