बजट से सबको ‘अच्छे दिनों’ की उम्मीद
(India)
‘अच्छे दिन आएंगे’ की उम्मीद लेकर आई एनडीए सरकार के तीसरे बजट में आम आदमी की आस घर के बजट को बिगाड़ने वाली खाद्य एवं खुदरा महंगाई पर काबू रखे जाने पर टिकी है। साथ ही सबको आवास मुहैया कराने की योजना को गति देने और छोटे घरों के लिए बड़ा होम लोन लेने वाले शहरी लोगों की उम्मीद छूट के दायरे में इजाफे की है। शहर से गांव तक हर कोई यही चाहता है कि उसके घर में पकने वाली रोटी-दाल के दाम काबू में रहें। ऐसा न हो कि खुदरा महंगाई के आंकड़े कुछ कहें और हकीकत में घर में दो जून की रोटी के लिए रेस्टोरेंट के दाम चुकाने पड़ें। गत वर्ष दाल के दामों में लगी आग दोबारा नहीं भड़के और अन्य सभी खाद्य सामग्रियों, सब्जियों के दाम काबू में रहें। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, बजट में खुदरा क्षेत्र में नीतिगत सुधार किए जाएंगे। इनमें कमी से पूर्व खाद्य सामग्रियों के आयात से जुड़े कई सुधार शामिल हैं। इसके अलावा सरकारी भंडारण की व्यवस्था में बेहतरी जैसे उपाय भी हैं। खुदरा महंगाई के तहत आने वाले कपड़े और जूतों समेत अन्य वस्तुओं के लिए भी सरकार बजट में कई उपाय करने वाली है। चमड़ा, जूट और कपास समेत अन्य निर्यात-आयात में संतुलन के कदम उठाए जाएंगे। इन क्षेत्रों को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार की ओर से घोषणाएं की जाएंगी। साथ ही वैश्विक मंदी के दौर में डब्ल्यूटीओ के तहत कम कीमतों के दौर में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए छूट का रास्ता भी दिखाया जा सकता है। सबको आवास मुहैया कराने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा को साकार रूप देने के लिए बजट में कदम उठाए जाने की उम्मीद है। लोग भी चाहते हैं, लेकिन विशेषज्ञों की मानें तो महज धन आवंटन की घोषणा से यह कारगर नहीं होगा। केंद्र राज्य सरकारों को भी इस मामले में उचित जिम्मेदारी के साथ शामिल करे। साथ ही निजी क्षेत्र को भी शामिल कर तेजी लाएं, ताकि 2022 तक सबको घर मिले।

Digital Desk: Kamal

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