नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (केग) की रिपोर्ट में दिल्ली सरकार को राजधानी की आर्थिक सेहत में सुधार के संकेतों को बरकार रखने के लिए व्यवहारिक बजट पेश करने की नसीहत दी है। जिससे बजट में पूरक मांगों से जुड़े ऐसे कोष की राशि उपयोग में नहीं लाए जाने की स्थिति से बचा जा सके। दिल्ली सरकार की वित्तीय स्थिति को दर्शाने वाली साल 2014-15 की केग रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार के बजट प्रस्तावों से जुड़े 6093.85 करोड़ रुपये इस्तेमाल ही नहीं किए गए। इससे साफ है कि बजट निर्माण प्रक्रिया में योजनाओं की पुख्ता पड़ताल नहीं की गई है। हालांकि साल 2014-15 के बजट में प्रावधानित 37117.99 करोड़ रुपये में 31024.14 करोड़ रुपये खर्च किए गए जबकि 6093.85 करोड़ रुपये की बचत भी हुई। इसी प्रकार केन्द्र द्वारा प्रायोजित विभिन्न योजनाओं और अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों के लाभार्थ योजनाओं पर आवंटित 265.82 करोड़ रुपये की राशि खर्च ही नहीं की गई। रिपोर्ट के मुताबिक फंड का इस्तेमाल नहीं किए जाने से विधानसभा द्वारा पारित बजट का मकसद ही नाकाम हो जाता है। रिपोर्ट में बजट राशि खर्च नहीं किए जाने का मूल कारण योजनाओं का लागू नहीं किया जाना बताया गया है। राशि के इस्तेमाल से वंचित रह गई योजनाओं में जेएनएनयूआरएम के तहत गरीबों के लिए घर बनाने की योजना में 130 करोड़ रुपये, पूर्वी नगर निगम के लिए जारी सहायता राशि 30 करोड़ रुपये, इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान को दिया गया 70 करोड़ रुपये का ऋण, बसें खरीदने के लिए डीटीसी की शेयर पूंजी राशि 69.82 करोड़ रुपये और जलबोर्ड को चंद्रावल जलशोधन संयंत्र के लिए जारी 30 करोड़ रुपये का ऋण शामिल है।
Digital Desk: Kamal
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