महंगाई बढ़ने के संकेतों और वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल के बढ़ते दामों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक आज द्वैमासिक मौद्रिक नीति की समीक्षा में नीतिगत दरों पर यथास्थिति बनाए रखा है। रिजर्व बैंक के गर्वनर रघुराम राजन ने पिछले साल जनवरी से लेकर अब तक नीतिगत ब्याज दरों में कुल मिला कर 1.5 फीसदी की ही कटौती की है। आरबीआई ने छह माह के अंतराल के बाद अप्रैल में नीतिगत ब्याज 0.25 प्रतिशत घटा कर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। वहीँ अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति बढ कर 5.39 प्रतिशत पर पहुंच गयी। वित्तीय कंपनी नोमूरा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मुद्रास्फीति पांच प्रतिशत से उपर बनी रहने से हमें लगता है कि वर्तमान नीतिगत दरें 2016 के अंत तक बनी रहेंगी।
Digital Desk: Kamal
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