कर चोरी और मनी लांड्रिंग के संदेह में पूंजी बाजार नियामक सेबी ने अब तक की सबसे कठोर कार्रवाई की है। उसने शुक्रवार को 260 कंपनियों और लोगों पर शेयर बाजार में खरीद-फरोख्त करने से रोक लगा दी है। इन मामलों में सेबी आगे और जांच करेगा। उसने आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), वित्तीय खुफिया इकाई समेत अन्य जांच एजेंसियों के साथ भी इन मामलों को साझा करने का फैसला किया है, ताकि अपने-अपने स्तर पर वे आवश्यक कार्रवाई कर सकें। दो अलग-अलग अंतरिम आदेशों के जरिये भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा कि इन 260 फर्मों को अगले निर्देश आने तक तत्काल प्रभाव से शेयर बाजार में कारोबार करने से रोका जाए। स्टॉक एक्सचेंजों और डिपॉजिटरियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि सभी निर्देशों का सख्ती से पालन हो। नियामक ने 152 फर्मों पर एक ही मामले में कार्रवाई की है। यह मामला फस्र्ट फाइनेंशियल सर्विस नाम की फर्म से संबंधित है। दूसरा मामला रैडफोर्ड ग्लोबल लिमिटेड से जुड़ा है, जिसमें 108 कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सेबी ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब सरकार ने काले धन पर अंकुश लगाने के लिए अपनी मुहिम को तेज कर दिया है। हाल ही में बाजार नियामक ने भी ऐसी कंपनियों पर अपनी निगरानी बढ़ा दी है जो महज कर चोरी या मनी लांड्रिंग की गतिविधियों के मकसद से ही बनाई जाती हैं।
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