वैसे तो किसी भी बैंकिंग या बीमा उत्पाद का ऑनलाइन माध्यम से या चेक के जरिये भुगतान बेहतर होता है, लेकिन स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर प्रावधान इस मायने में ज्यादा सख्त हैं। अगर आप इसका भुगतान कैश करते हैं तो फिर आयकर कानून की धारा 80डी के तहत छूट का दावा नहीं कर पाएंगे। आयकर विभाग ऐसी खरीद पर आपसे अतिरिक्त जानकारी भी मांग सकता है। अगर लेनदेन संदिग्ध हुआ तो आप पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
अगर आप एक दिन में किसी से भी दो लाख रुपये या उससे ज्यादा नकद स्वीकार करते हैं, तो भी आयकर कानून के तहत कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। अगर आपने एक ही व्यक्ति से एक दिन में कई हिस्सों में भी दो लाख रुपये से ज्यादा लिए हैं तो भी आयकर कानून के तहत कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। लिहाजा चेक या ऑनलाइन भुगतान ही बेहतर विकल्प है। आयकर कानून की धारा 271डीए के तहत आप पर नकद लेनदेन की राशि के बराबर तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और अगर मामला बेनामी संपत्ति या हवाला कारोबार का निकला तो कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
अगर आप कोई अचल संपत्ति खरीद रहे हैं तो उसमें भी 20 हजार रुपये से अधिक का भुगतान न करें। ऐसा भुगतान करने वाला और लेने वाला दोनों कार्रवाई के दायरे में होंगे। ऐसे मामलों में चेक, डीडी या नेटबैंकिंग जैसे माध्यमों का ही इस्तेमाल करें। दोषी पाए जाने पर आयकर की धारा 271डी के तहत आप पर लेनदेन की राशि से लेकर लोन की राशि के बराबर तक का जुर्माना लगायाजा सकता है। न ही कर छूट का लाभ मिलेगा।
Digital Desk: Firoz Khan
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।