कर्जदाताओं के साथ रविवार को समझौता होने के बाद कंपनी प्रबंधन की तरफ से यह बयान आया है। एस्सेल ग्रुप ने कहा कि प्रमोटरों की कर्जदाताओं के साथ लंबी वार्ता चली, जिसमें यह यह फैसला किया गया कि सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों के भाव में भारी गिरावट आने के बाद भी शेयरों की बिक्री नहीं की जाएगी। समूह की कंपनियों के शेयर जिनके पास गिरवी थे, उन्होंने शुक्रवार को उसमें से आधा फीसद से अधिक शेयरों की बिक्री कर दी थी। ZEEL के प्रबंध निदेशक पुनीत गोयनका ने कहा कि रविवार को कर्जदाताओं के साथ हुई बैठक में यह तय हुआ है कि आगे शेयर की कीमतों में गिरावट भी आती है, तो वह और शेयरों की बिक्री नहीं करेंगे।
शुक्रवार को ZEEL का शेयर 26 फीसद तक टूट गया था। शुक्रवार को जहां जी एंटरटेनमेंट का शेयर 26.43 फीसदी की गिरावट के साथ 319.35 रुपये पर बंद हुआ वहीं जी मीडिया का शेयर 9.05 फीसदी, जी लर्न का शेयर 18.49 फीसदी, डिश टीवी 32.74 फीसदी और एस्सेल प्रो पैक का शेयर 16.08 फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुआ।
सोमवार को बंबई स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी के शेयर करीब 10 फीसद की तेजी के साथ खुले। वहीं एस्सेल प्रोपैक का शेयर भी करीब 10 फीसद से अधिक की उछाल के साथ ट्रेड कर रहा है। हालांकि जी मीडिया के शेयरों की पिटाई सोमवार को भी जारी है। बीएसई में कंपनी का शेयर करीब 20 फीसद नीचे ट्रेड कर रहा है।
गोयनका ने कहा कि ZEEL की हिस्सेदारी बिक्री को लेकर बातचीत रास्ते पर है और कई लोगों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई है। नवंबर 2018 में कंपनी ने कहा था कि वह प्रोमोटर्स की 41 फीसद हिस्सेदारी बेचे जाने पर विचार कर रही है।
ZEEL में प्रोमोटर्स की हिस्सेदारी बिक्री के अलावा एस्सेल ग्रुप ने भी अपनी तीन इंफ्रा एसेट्स को बिक्री के लिए रखा है।
पिछले हफ्ते शुक्रवार को जब शेयर बाजार में जी एंटरटेनमेंट के शेयर क्रैश हुए, उसी दिन एस्सेल ग्रुप के संस्थापक और इसके चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने यह आरोप लगाया कि कुछ ”नकारात्मक ताकतें” जी एंटरटेनमेंट में कंपनी के मालिकों की हिस्सेदारी की बिक्री की प्रक्रिया को पटरी से उतारने की कोशिश कर रही हैं।
चंद्रा ने कहा कि वह इस हिस्सेदारी को बेचकर ही एस्सेल ग्रुप के कर्ज का भुगतान कर पाएंगे। खुले पत्र में चंद्रा ने माना कि उनसे कुछ ”गलतियां” हुई हैं। उन्होंने बैंकर्स, नॉन बैकिंग फाइनैंस कंपनियां और म्युचुअल फंड्स से भी माफी मांगी थी।
शुक्रवार को मीडिया में आई एक रिपोर्ट शायद समूह की कंपनियों के शेयरों की पिटाई का कारण बना। मीडिया में छपी एक रिपोर्ट में नित्यांक इंफ्रापावर एंड मल्टीवेंचर्स के साथ समूह के कथित संबंध का जिक्र किया गया है। यह कंपनी नोटबंदी के बाद 3,000 करोड़ रुपये जमा कराए जाने की वजह से एसएफआईओ (गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय) की निगरानी में है। शुक्रवार को एस्सेल प्रोपैक और जी की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि नित्यांक का एस्सेल ग्रुप के साथ कोई लेना देना नहीं है।
Digital Desk: Firoz Khan
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