होम लोन लेते हैं बैंक उसकी पूरी राशि का बीमा कवर लेने को कहते हैं। सामान्यत: इसका प्रीमियम एक बार में ही चुकाना होता है। ऐसे में आप 25 लाख रुपये के होम लोन का बीमा कराते हैं तो प्रीमियम की राशि भी होम लोन में जोड़ ली जाती है। इससे ईएमआई भी बढ़ जाती है। साथ ही सिर्फ होम लोन का कवर होने की वजह से कर्ज की राशि घटने के साथ बीमा कवर भी घटता जाता है। इससे दोहरा नुकसान होता है। ऐसे में आप होम लोन पर ब्याज चुकाने के साथ बीमा कवर की खातिर लिए गए कर्ज के प्रीमियम पर भी ब्याज भरते हैं।
होम लोन बीमा तीन तरह के होते हैं। इनमें सबसे पहला है घटता कवर प्लान। इसमें बकाये कर्ज में कमी के साथ बीमा कवर भी घटता जाता है। इसके अलावा इसमें अन्य मुश्किलों का भी सामना करना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए आपने होम लोन 8.50% ब्याज पर लिया लेकिन दरें बाद में बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में कर्ज लेने वाले व्यक्ति की कर्ज चुकाने की क्षमता घट जाएगी और बकाया पहले के मुकाबले अधिक हो जाएगा। बीमा कवर घटने वाली पॉलिसी होने के मामले में यदि कर्जदार की असामयिक मृत्यु हो जाए तो बीमा कवर बकाये कर्ज से कम हो सकता है। ऐसे में परिवार को कर्ज चुकाना पड़ सकता है।
Digital Desk: Firoz Khan
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