इन बैंकों ने अपील की थी कि अनिल अंबानी को तय शर्त के मुताबिक बकाया 680 मिलियन डॉलर यानी लगभग 4,690 करोड़ की रकम कोर्ट में जमा करवाने का निर्देश दिया जाए। हालांकि, जज डेविड वाक्समैन ने तय किया अनिल अंबानी को छह सप्ताह के भी अदालत में 100 मिलियन डॉलर यानी करीब 715 करोड़ रुपये जमा करवाना होगा। जज ने अनिल अंबानी के वकीलों के इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया कि भारत में उनकी शुद्ध संपत्ति शू्न्य हो गई है और परिवार भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आएगा।
जज वाक्समैन ने कहा 'अंबानी मुझे इस मसले पर संतुष्ट करने में विफल रहे हैं कि वह कुछ भी भुगतान करने में असमर्थ हैं। वह इस बात पर जोर दे रहे हैं कि व्यक्तिगत रूप से दिवालिया हो चुके हैं। क्या उन्होंने भारत में दिवालिया आवेदन किया है?' इसके जवाब में अनिल अंबानी के वकीलों की टीम में शामिल हरीश साल्वे ने कहा- नहीं।
अनिल अंबानी के वकीलों ने सुनवाई के दौरान कहा, 'अंबानी का नेटवर्थ 2012 से लगतार नीचे आ रहा है। भारत सरकार की स्पेक्ट्रम देने की नीति में बदलाव से भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में नाटकीय बदलाव आया है। वर्ष 2012 में अंबानी का निवेश सात अरब डॉलर से अधिक का था।
Digital Desk: Firoz Khan
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