अपने पूर्वजों को जगाने के लिए क्या-क्या करते हैं ये आदिवासी!
(India)

साउथ अफ्रीका में ना जानें कितनी ही जनजातियां जो अपनी विशेषताओं से सुर्खियां बनाती हैं। लेकिन, इस बार हम आपको बताना चाहते हैं ऑस्ट्रेलिया की एक ऐसी जनजाति के बारे में जो कुछ अनोखा काम करती है। डेली मेल के मुताबिक पश्चिमी क्वीन्सलैंड में रहने वाले मरिनयामा ग्रुप के लोग कंगारू सोसायटी के नाम से भी जाने जाते हैं। इस जाति के पुरूष हर साल एक तीर्थ यात्रा पर निकलते हैं जहां ये लोग कुछ अलग सा काम करने के बाद अपने पूवर्जों का जगाते हैं। ऐसा करने के लिए ये लोग अपनी गर्मियों के तीन महीने क्वीन्सलैंड की रेत के बाहर बने चेकपोस्ट पर झाड़ियों में रहकर बिताते हैं।
40 डिग्री से ज्यादा तापमान में रह रहे ये लोग गाना गाकर अपना समय बिताते हैं। वो इंतजार में होते हैं कि कब उनके वार्षिक त्योहार का दिन आएगा और वो अपने पूवर्जों से बात कर सकेंगे। इसके लिए वो खास तैयारी करते हैं। पत्थर के पैनीले टुकड़ों से ये लोग खुदके शरीर पर डिजाइन बनाते हैं। इनके निशान पूरे पीठ और हाथों पर बने रहते हैं। इसके बाद कई तरह के रंगों से वो अपने शरीर पर बॉडी पेंट लगाते हैं। इस दौरान वो कई गुफाओं में भी पेंटिंग बनाते हैं। इस जाति के लोग अपनी पोशाक में एक हैट शामिल करना नहीं भूलते। उसे ये लोग घ्योरी बोलते हैं। ये लोग ऐसा मानते हैं कि इस कंगारू सेरेमनी में बदन पर निशान बनाना इन्हें इनके पूवर्जों के करीब ले जाता है। वो ऐसा बताते हैं कि कुछ पूजा-पाठ के बाद अपने पूवर्जों को जगा पाते हैं।

Author: JAN TV Editorial Team

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