राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की वियतनाम यात्रा के दूसरे दिन सात समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में नौवहन की स्वतंत्रता के पक्ष में दोनों देशों ने एकजुटता दिखाई। राष्ट्रपति मुखर्जी चार दिवसीय यात्रा पर रविवार को हनोई पहुंचे थे। चीन के राष्ट्रपति की भारत यात्रा से पहले भारत और वियतनाम के ऐतिहासिक रिश्ते की जड़ को सींचा जाने लगा है। बौद्ध दर्शन से प्रभावित वियतनाम में बोधि वृक्ष का पौध लगाकर और कई अन्य क्षेत्रों में सहयोग के जरिए संबंधों की नई परिभाषा लिखी जा रही है। बोधि वृक्ष की पौध लगाने के बाद प्रणब ने दोनों देशों के युवाओं में आपसी जिज्ञासा और समझ बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने संकेत दिया कि भारत हनोई में सांस्कृतिक केंद्र खोलेगा। वियतनाम में प्रणब की यात्रा को चीनी राष्ट्रपति की आगामी भारत यात्रा के कारण भी विशेष नजरिए से देखा जा रहा है। भारत चीन को संकेत देना चाहता है कि वह दोनों देशों के साथ अच्छे रिश्ते चाहता है और वह भी बिना किसी दबाव के। प्रणब की यात्रा इस मायने से भी अहम है, क्योंकि वियतनाम के सबसे मजबूत नेता नूयेन फूत्रांग के साथ उनके आपसी रिश्ते भी खास रहे हैं। बताते हैं कि चार-पांच साल पहले जब नूयेन भारत आए थे, तो प्रणब को बोधि वृक्ष के नीचे का अपना अनुभव बताया था। प्रणब ने उसी वक्त यह कह दिया था कि नूयेन का भविष्य उन्हें बहुत आगे ले जाएगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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