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पिछले साल प्रायद्वीपीय सिनाई प्रांत में घात लगा कर बैठे उग्रवादियों ने इन 25 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। इस्लामिक उग्रवादी आदेल हाबारा और सात अन्य पर अगस्त 2013 में घात लगाकर पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोप था। उस वक्त ये पुलिसकर्मी ड्यूटी पर नहीं थे। इस घटना के एक महीने पूर्व ही इस्लामिक राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से बेदखल किया गया था। इन उग्रवादियों को अल-कायदा उग्रवादी समूह के साथ जासूसी का भी दोषी ठहराया गया। कल सुनाया गए फैसले को अंतिम रूप तभी मिलेगा जब प्रधान मौलवी इसपर अपनी सहमति की मुहर लगाएं। मिस्र के कानून के मुताबिक मृत्युदंड की सजा से संबंधित सारे फैसलों में प्रधान मौलवी की समीक्षा जरूरी होती है। स्थानीय मीडिया से मिली खबरों के अनुसार, मामले में अंतिम निर्णय छह दिसंबर को होना तय किया गया है। इस्लामिक नेता हाबारा कई अन्य उग्रवादी हमलों में भी शामिल रहा है जिनमें वर्ष 2012 में राफाह में हुआ एक बड़ा हमला भी शामिल है। उस हमले में 16 सुरक्षा कर्मी मारे गए थे। पिछले साल मुर्सी को अपदस्थ किए जाने और सरकार गिर जाने के बाद से पुलिस और सेना पर आतंकी हमले बढ़ गए हैं। तब से अब तक 500 से अधिक सुरक्षा कर्मियों की हत्या कथित तौर पर की जा चुकी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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