मोच: मोच आने पर इमली के ताजा पत्ते गर्म पानी में पीसकर गुनगुना लेप दर्द वाले स्थान पर लगाने से लाभ होता है।
उल्टी: इमली के तने की भस्म पानी में उबालकर पीने से उल्टी नहीं होती।
हैजा: इमली से बनने वाली चिंचा भल्लात कंवटी, चिंचिकादिवंटी दस्तों व हैजे की पहली स्टेज की उपयोगी दवा है।
नुकसान
खांसी-जुकाम में न खाएं: कच्ची इमली शारीरिक रूप से दुर्बल, खांसी, दमा, जुकाम में नुकसान कर सकती है।
चर्म रोग, गठिया में इमली से रहे दूर: इसे दूध या दूध से बनी खीर, जोड़ों के दर्द, गठिया, लकवा, गुर्दे के रोग, रक्त विकार और चर्म रोग में प्रयोग न करें।
Author: JAN TV Editorial Team
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