युवा महिलाओं को भी आता है हार्ट अटैक, जानें दिल से जुड़े FACTS
(India) दरअसल, हाल ही में एक रिपोर्ट के अनुसार 45 प्रतिशत महिलाओं की मृत्यु हार्ट अटैक के कारण हो रही है। आज हम आपको महिलाओं को हृदय रोग से जुड़ी जानकारी के बारे में बता रहे हैं, जो सभी महिलाओं को पता होना ज़रूरी है।
1-दिल से जुड़े तथ्य
ऐसा नहीं है कि पुरुषों में ही मृत्यु होने का कारण हार्ट अटैक होता है, बल्कि महिलाओं में भी दिल से जुड़ी बीमारी होने पर मृत्यु होने का खतरा बना रहता है। एक नए अध्ययन के अनुसार,भारत में हर पांच में से तीन महिलाओं में 35 साल की उम्र से ही हृदय रोग की चपेट में आने का खतरा रहता है। लेकिन ज्यादातर महिलाओं का यही मानना होता है कि कम से कम 50 वर्ष की उम्र तक वह हृदय रोग से सुरक्षित हैं।
2- यंग महिलाओं में भी हो सकती है हृदय रोग की शिकार
एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोंस दिल की बीमारी से महिलाओं की रक्षा करते हैं,इसलिए युवा महिलाओं को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। यह सबसे बड़ी गलतफहमी है कि युवा महिलाओं को हृदय रोग से जुड़े जोखिम वाले कारकों के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। न्यूयॉर्क सिटी में मोंटेफियोर सेंटर के कॉर्डियोलॉजिस्ट जे जूलिया शिन के अनुसार, हालही में यह भी देखा गया है कि युवा महिलाएं भी दिल से जुड़ी बीमारियों की शिकार हो रही है। दरअसल आजकल की बदलती लाइफस्टाइल से इस तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
3-हृदय रोग से मौत का खतरा
हर साल पुरुषों की तुलना में काफी संख्या में महिलाएं की मौत हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण होता हैं। सयुंक्त राज्य अमेरिका में हर 90 सेकेंड में एक महिला दिल के दौरे से ग्रस्त होती है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी स्वास्थ्य खतरा हृदय रोग का सबसे बड़ा कारण जानकारी की कमी है। अमेरिका हर्ट एसोसिएशन (एएचए) की रिपोर्ट के अनुसार,2004 में लगभग 42.1 मिलियन महिलाओं को हृदय रोग था और जिसके चलते 461 हजार मौत हुई थी।
4-हृदय रोग पर कंट्रोल के लिए क्या करें।
40 से 60 की उम्र लगभग 80 प्रतिशत महिलाओं में एक या एक से अधिक हृदय रोग के जोखिम कारक को नियंत्रित या कम किया जा सकता है। जोखिम कारकों को नमक के सेवन,धूम्रपान,हाई एलडीएल(गंदा) कोलेस्ट्रॉल के स्तर या कम एचडीएल(अच्छा) स्तर,हाई ब्लड प्रेशर,मोटापा,शारीरिक निष्क्रियता, अनियंत्रित मधुमेह और उच्च तनाव के स्तर को नियंत्रित करके कम किया जा सकता है।
5-इलाज की कमी के कारण
पुरुषों की तुलना में महिलाएं अपना ध्यान कम रखती है जिस कारण अपने इलाज पर ध्यान नही देती और बीमारी से जुझती रहती है। जिन महिलाओं में हृदय रोग का खतरा होता हैं,उनका भी पुरुषों की तरह नियमित रूप से परीक्षण होना चाहिए।
6-स्ट्रोक का खतरा अधिक होना
महिलाओ में दिल के अटैक कई बार होने से स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। लेकिन वह पहचाना नहीं जाता है। चिकित्सकों के तहत मूल्याकंन और महिलाओं का इलाज हो सकता है,क्योंकि उनमें आदमी की तरह उच्च जोखिम प्रकट नहीं करते,खासतौर पर अगर वह युवा हैं और स्वस्थ दिखाई देती है।

Author: JAN TV Editorial Team

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