(International)
इस घटना में 300 से ज्यादा लोग मारे गए थे और इनमें से अधिकांश स्कूली छात्र थे। पांच माह तक चली इस मुकदमे की नाटकीय और पीड़ादायक सुनवाई के बाद तीन न्यायाधीशों की अदालत ने कहा कि मौत की सजा की मांग करने वाले वकील यह साबित करने में विफल रहे हैं कि सिवोल के कैप्टन ली जुन-सियोक (69) ने लोगों की हत्या के इरादे के साथ काम किया। हालांकि कैप्टन को भारी लापरवाही बरतने और कर्तव्य निवर्हन में खामी का दोषी ठहराया गया। वह जहाज को ऐसे समय में छोड़कर भाग गये थे, जब सैंकड़ों यात्री उसपर फंसे थे। इनमें से अधिकतर स्कूली छात्र थे। पीड़ितों के जो संबंधी दक्षिणी शहर ग्वांग्जू के अदालतकक्ष में मौजूद थे, उन्होंने हत्या के आरोप से मुक्ति दिए जाने पर गुस्सा जाहिर किया। एक महिला न्यायाधीशों पर चिल्लाई, न्याय कहां है? जबकि अन्य लोग खुलकर रोने लगे। एक अन्य महिला चिल्लाई, यह सही नहीं है। हमारे बच्चों की जिंदगियों का क्या? ये (प्रतिवादी) तो मौत से भी भयानक सजा के हकदार हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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