(International)
गौर हो कि भारत ने सोमवार को लखवी की रिहाई पर कड़ा ऐतराज जताया था। जानकारी के अनुसार, लखवी को अपहरण के एक अन्य मामले में आज हिरासत में ले लिया गया। लखवी के वकील ने यह जानकारी दी कि लखवी को रिहाई से पहले एक अन्य मामले में हिरासत में लिया गया है। गौर हो कि पाकिस्तान की एक अदालत ने लखवी को हिरासत में लेने के सरकारी आदेश को सोमवार निलंबित कर दिया था, जिसको लेकर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि पाकिस्तान कुख्यात आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश नूर उल हक कुरैशी ने लखवी के वकील की दलीलें सुनने के बाद लोक व्यवस्था बनाये रखने से जुड़े आदेश पर लखवी की हिरासत पर रोक लगाई। हालांकि सरकारी विधि अधिकारी सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुए। बीते 18 दिसंबर को आतंकवाद विरोधी अदालत के न्यायाधीश सैयद कौसर अब्बास जैदी ने सबूत के अभाव का हवाला देते हुए लखवी को जमानत दे दी थी, लेकिन उसके जेल से बाहर आने से पहले ही पाकिस्तान की सरकार ने 26/11 हमले में लखवी को लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी आदेश (एमपीओ) के तहत हिरासत में लेने का आदेश दिया था। पाकिस्तानी गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि सरकार एक अन्य मामले में लखवी को हिरासत में ले सकती है। उन्होंने कहा कि चूंकि जेल से लखवी की रिहाई की विश्वभर में खासकर भारत द्वारा आलोचना की जाएगी, पाकिस्तानी सरकार किसी अन्य मामले में लखवी को हिरासत में ले सकती है जैसा कि उसने लश्कर-ए-झांगवी (एलईजे) प्रमुख मलिक इसहाक के मामले में किया। सरकार द्वारा एमपीओ के तहत इसहाक की हिरासत बढाने की मांग नहीं करने के बाद इसहाक की रिहाई से ठीक पहले उसे हत्या और आतंकवाद के एक मामले में न्यायिक हिरासत में भेजा गया। लखवी के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करने पर पाकिस्तान से ‘गहरी चिंता’ जताते हुए भारत ने कहा कि यह पड़ोसी देश अभी भी कुख्यात आतंकी समूहों की सुरक्षित पनाहगाह बना हुआ है। इस मामले को भारत ने यहां और इस्लामाबाद दोनों जगह पाकिस्तान के समक्ष उठाया। विदेश सचिव सुजाता सिंह ने यहां पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित को तलब कर इस सिलसिले में पड़ोसी देश में किए गए फैसले पर चिंता जताई। पाकिस्तान में भारत के उच्चायोग ने यह मामला पाकिस्तान के विदेश विभाग के समक्ष उठाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरूद्दीन ने यहां बताया कि विदेश सचिव ने बासित को तलब किया। विदेश सचिव ने पाकिस्तान की आतंक-निरोधी अदालत द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी और मुंबई आतंकी हमले की साजिश में शामिल लखवी को रिहा करने के आदेश के खिलाफ पाकिस्तान के अभियोजन प्राधिकारों की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं करने पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश से एक बार फिर कहा गया कि हम पाकिस्तान से उम्मीद करते हैं कि वह हमें दिए गए इन आश्वासनों को पूरा करेगा कि मुंबई के आतंकी हमले को अंजाम देने के लिए जिम्मेदार सभी लोगों को सजा दिलाने के काम में तेजी लाई जाएगी। प्रवक्ता ने कहा कि यह बहुत ही चिंताजनक है कि छह साल से ऐसे आश्वासन दिए जाने, और हाल ही में पाकिस्तान में हुई त्रासदीपूर्ण घटना (पेशावर में सैन्य स्कूल में बच्चों का नरसंहार) के बावजूद पाकिस्तान कुख्यात आतंकी समूहों की पनाहगाह बना हुआ है
Author: JAN TV Editorial Team
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