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पाकिस्तान को और आर्थिक सहायता दिए जाने का रास्ता तैयार करते हुए अमेरिका के विदेश मंत्री जॉन केरी ने इसे जायज ठहराया। उन्होंने आतंकवाद पर पाकिस्तान को एक तरह से क्लीनचिट देते हुए कहा कि पाकिस्तान सरकार ने लश्कर-ए-तोएबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की है। आतंकवाद को लेकर अमेरिका किस तरह दोहरी नीति अपना रहा है इसका ताजा उदाहरण अमेरिका की ओर से पाकिस्तान को क्लीनचीट दिए जाने से मिलता है। भारत की यात्रा पर आने से ठीक पहले अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने पाकिस्तान सरकार को अल कायदा, लश्कर-ए-तोएबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का सर्टिफिकेट दिया है। वहीं, अमेरिकी कांग्रेस से 2010 में पारित केरी-लुगार बिल के तहत पाकिस्तान को 2010-14 के दौरान 1.5 अरब डॉलर प्रति वर्ष असैन्य अमेरिकी सहायता मिल सकती है। जॉन केरी के सर्टिफिकेट के साथ ही उम्मीद की जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जल्द ही पाकिस्तान को आर्थिक सहायता जारी कर देंगे। इस बिल में आतंक के खिलाफ कार्रवाई को महत्वपूर्ण शर्त माना गया है, जिसकी पूर्ति के बाद ही अमेरिका से आर्थिक सहायता को हरी झंडी मिलती है। भारत के खिलाफ हमले के साजिशकर्ताओं को पाकिस्तान में मिल रहे प्रश्रय के बावजूद उसे अमेरिकी मदद से भारत में तीखी प्रतिक्रिया हो सकती है। जहां पाकिस्तान की जमीं से आतंकवादी भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं, वहीं हाफिज सईद जैसे मुंबई हमले के आरोपियों के खिलाफ वह अपेक्षा के अनुरुप कार्रवाई नहीं कर रहा है। गौर हो कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि के तौर पर 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस समारोह में आएंगे। जबकि उनके दौरे के पहले ही जॉन केरी वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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