भारत और अमेरिका ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण सैन्य सहयोग समझौता किया। इसके तहत दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के सामान और सैन्य ठिकाने का इस्तेमाल मरम्मत और आपूर्ति के लिए कर सकेंगी। इस मुद्दे पर पिछली यूपीए सरकार के समय समझौता नहीं हो पाया था। इस मौके पर रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और भारत दौरे पर आए अमेरिका के रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर मौजूद थे। कार्टर ने स्पष्ट किया कि समझौते पर कुछ हफ्ते या महीने के अंदर दस्तखत हो जाएगा। लेकिन इसका मतलब भारत की धरती पर अमेरिकी सैनिकों की तैनाती नहीं है। हालांकि चीन की हिंद महासागर और प्रशांत महासागर में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह करार बेहद अहम है। दोनों देश रक्षा विभागों और विदेश मंत्रालयों के अधिकारी नौवहन सुरक्षा संवाद स्थापित करने को भी राजी हुए। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती दखलंदाजी को देखते हुए संभवतरू ऐसा किया गया है। पर्रिकर ने कहा कि मानवीय सहायता जैसे नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के समय अगर उन्हें ईंधन या अन्य सहयोग की जरूरत होती है तो उन्हें ये सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी। पहले भारत का मानना था कि साजोसामान समझौते को अमेरिका के साथ सैन्य गठबंधन के तौर पर देखा जाएगा। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि साजोसामान समझौते से दोनों देशों की सेनाओं को बेहतर तरीके से समन्वय में सहयोग मिलेगा जिसमें अभ्यास भी शामिल है और दोनों एक-दूसरे को आसानी से ईंधन बेच सकेंगे या भारत को कलपुर्जे मुहैया कराए जा सकेंगे।
Author: JAN TV Editorial Team
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