नए साल में अर्थव्यवस्था के सुधरने की उम्मीद
(India)
अर्थव्यवस्था की धीमी होती रफ्तार और बढ़ती महंगाई ने साल भर अर्थव्यवस्था प्रबंधकों को परेशान किए रखा। अब नए साल में पूरे उद्योग जगत को नई सरकार के गठन के बाद खुशखबरियों की उम्मीद है। देश की आर्थिक वृद्धि दर पूरे साल डगमगाती रही। सरकार ने सुधारों के कई फैसले लिए और रिजर्व बैंक से राहत की उम्मीद करती रही। मगर, बढ़ती महंगाई ने केंद्रीय बैंक को ज्यादा कुछ करने का मौका नहीं दिया और 2013 ऐसे ही जूझते हुए खत्म हो गया। 2013 में रुपये ने सरकार को खूब रुलाया। भारतीय मुद्रा ऐतिहासिक गिरावट का शिकार हुई और चालू खाते का घाटा ख्सीएडी, भी ऊपर बढ़ता रहा। इसके चलते सरकार के जख्म और हरे हो गए। पिछले वित्त वर्ष 2012-13 में आर्थिक विकास दर पांच फीसद के निचले स्तर पर पहुंच गई थी। फरवरी में वित्त मंत्रालय के आर्थिक सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया कि चालू वित्त वर्ष 2013-14 के दौरान यह वृद्धि दर 6.1 से 6.7 फीसद के बीच पहुंच जाएगी। यह सरकारी सपना बहुत जल्द टूट गया। अप्रैल-सितंबर की दूसरी तिमाही के दौरान विकास दर 4.6 फीसद पर आ गिरी।

Author: JAN TV Editorial Team

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