देश की कृषि वृद्धि दर 2014-15 में एक प्रतिशत की कमतर दर पर रहेगी और ऐसा मुख्य तौर पर पिछले साल के मजबूत सांख्यिकीय आधार की वजह से होगा। यह बात रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कही। मॉनसून फिलहाल औसतन 24 प्रतिशत कम है जो वित्त वर्ष 2008-09 या 2011-12 में दर्ज बारिश की कमी के अनुपात से भी कम है। 2008-09 सूखे का साल रहा और 2011-12 में मौसम के बाद के हिस्से में काफी बारिश हुई। क्रिसिल ने कहा कि इस साल हमारा मानना है कि 2012 की तरह ही हालात बदलने की बड़ी संभावना है। यह मौसम विभाग के अनुमान के अनुरूप है कि जिसने कहा है कि मौसम के अंत तक बारिश की कमी घटकर 10 प्रतिशत से भी कम रहेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
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