म्यांमार की पूर्व राजधानी यंगून से 145 मील स्थित जिया बाड़ी में बसे 70 हजार भारतीयों की इच्छा है कि भारत सरकार उन्हें कृषि की नई तकनीक प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। वे आज भी खेती के लिए पारंपरिक तकनीक का उपयोग करने को मजबूर हैं। इन लोगों का कहना है कि भारत ने कृषि क्षेत्र में जोरदार विकास किया है। लिहाजा, अगर भारत सरकार उन्हें भी नई तकनीक से परिचित करवाए तो यहां के किसानों की गरीबी दूर हो सकती है। जिया बाड़ी क्षेत्र में बिहार के विभिन्न जिलों से संबंधित हजारों लोग रहते हैं। एक सदी से अधिक समय बीत जाने के बाद आज भी अपनी भाषा, अपनी सभ्यता और संस्कृति से पूरी तरह जुड़े हैं। उन्नीसवीं सदी के अंतिम दशक में बिहार के जागीरदार केशव प्रसाद सिन्हा को अंग्रेजों ने म्यांमार में 20 हजार एकड़ जमीन ब्रिटिश सरकार की सेवा के बदले दी थी। तब यहां घने जंगल थे। इसे कृषि योग्य बनाने के लिए सिन्हा को बड़ी संख्या में मजदूरों की जरूरत थी। ऐसे में उन्होंने बिहार के तमाम गांवों में रहने वाले लोगों को सुनहरा सपना दिखा म्यांमार में स्थानांतरित किया। अपने जीवन को खतरे में डाल इन सभी ने जंगलों को काटकर जमीन कृषि योग्य बनाने में सफलता प्राप्त कर ली तो जागीरदार और उसके दीवान ने उनका जबरदस्त शोषण किया। साथ ऐसी कोशिश की कि वहां बसे बिहारी मजदूर हमेशा अनपढ़ रहें और खेतों में मजदूरी के अलावा कोई दूसरा काम न कर सकें।
Author: JAN TV Editorial Team
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