पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ देशों की ‘विस्तारवादी’ प्रवृत्ति की निंदा की
(International) उनकी यह टिप्पणी परोक्ष रूप से चीन के खिलाफ मानी जा रही है जिसका जापान के साथ समुद्री विवाद है। मोदी ने यहां भारत और जापान के व्यापार जगत की हस्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि समूचा विश्व स्वीकार करता है कि 21वीं सदी एशिया की होगी। लेकिन मेरा एक सवाल है। 21वीं सदी कैसी होनी चाहिए? हमें इसका उत्तर देना है। यह इस पर निर्भर करेगा कि हमारे (भारत और जापान के बीच) संबध कितने गहरे हैं।
उन्होंने कहा कि हमें निर्णय करना होगा कि हम ‘विकासवाद’ चाहते हैं या ‘विस्तारवाद’, जिसका परिणाम विघटन की ओर जाता है। जो बुद्ध के रास्ते को मानते हैं और ‘विकासवाद’ पर भरोसा रखते हैं, वे विकास करते हैं। लेकिन हम देखते हैं, कि जो 18वीं सदी के विचार रखते हैं, वे अतिक्रमण में शामिल हैं और (दूसरों के) सागरों में प्रवेश करते हैं। मोदी ने किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन उनकी इस टिप्पणी को चीन पर निशाने के रूप में देखा जा सकता है जिसका अपने पड़ोसियों भारत, जापान और वियतनाम सहित कुछ अन्य के साथ क्षेत्रीय विवाद है। भारत और चीन के बीच 4,000 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा है। चीन अरुणाचल प्रदेश की लगभग 90 हजार वर्ग किलोमीटर और जम्मू कश्मीर की 38 हजार वर्ग किलोमीटर भूमि पर दावा करता है।

Author: JAN TV Editorial Team

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