मोदी और पवार के इन कार्यक्रमों को सिर्फ औपचारिक रस्मअदायगी से ज्यादा पढ़ा और समझा जा रहा है। कांग्रेस से बढ़ती दूरी और मोदी से नजदीकी में तमाम संभावनाएं सामने आती दिख रही हैं। जिस तरह से पवार ने संकेत किया है कि कांग्रेस की खाली होती जगह को दूसरी पार्टियों को भरना चाहिए। उससे साफ है कि पवार बड़ी भूमिका और राजनीतिक संभावना के तौर पर संकेत देने की कोशिश कर रहे हैं।बारामती में जहां मोदी शरद पवार के विद्या विकास प्रतिष्ठान के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे, वहीं पवार उन्हें बारामती का विकास भी दिखाएंगे। इसमें आदर्श ग्राम व महिला सशक्तिकरण जैसे काम प्रमुख होंगे। मोदी वहां किसानों की एक सभा को भी संबोधित करेंगे। साथ ही, कृषि से जुड़े कुछ संस्थानों की शुरुआत भी करेंगे। यह पहला मौका नहीं होगा, जब मोदी और पवार नजदीक आएंगे। लोकसभा चुनावों से पहले शरद पवार मोदी से मिलने बाकायदा गुजरात गए थे। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कांग्रेस और एनसीपी व सेना और बीजेपी का चुनाव पूर्व गठबंधन टूटने के पीछे भी इन दोनों नेताओं की नजदीकी मानी गई। इसके बाद राज्य में सरकार बनाने के लिए बीजेपी को बिन मांगे एनसीपी का समर्थन भी मोदी और पवार की आपसी अंडरस्टैंडिंग माना गया। हालांकि दोनों के बीच इस केमिस्ट्री के पीछे अडानी और अंबानी जैसे कॉमन फैक्टर भी बताए जाते हैं।कांग्रेस पर उठे सवाल के पीछे पवार की कहीं न कहीं विपक्ष के सर्वमान्य नेता के तौर उभरने की तमन्ना भी मानी जा रही है। पवार का बयान कांग्रेस में असंतुष्ट सीनियर नेताओं को संकेत भी माना जा सकता है। समझा जाता है कि कांग्रेस को मजबूती देने में पवार कैटलिस्ट की भूमिका निभा सकते हैं। कांग्रेस में सर्वोच्च पद के लिए उनका मोह नया नहीं है। पहले भी वह सीताराम केसरी के खिलाफ अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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