नेपाल में विनाशकारी भूकंप के बाद अब भोजन, पानी, बिजली औरं दवाओं की भारी किल्लत से संकट और गहरा गया है और मरने वालों की संख्या भी 4,264 को पार कर गई है। दहशत का आलम यह है कि हजारों लोग खुले में रहने को मजबूर हैं, जबकि विदेशी नागरिक अपने देश लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं जिससे यहां के एकमात्र अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गई है। शक्तिशाली भूकंप और इसके बाद आए कई झटकों से हुई तबाही के बाद से लोग दहशत के बीच खुले में रहे हैं। बारिश और ठंड से लोग खुद को बचाने के लिए प्लास्टिक के टेंट का सहारा ले रहे हैं।ईंधन और दवाओं की आपूर्ति भी काफी कम है। कुछ ऐसे ही हालात काठमांडू के उपनगरीय और दूसरे ग्रामीण इलाकों में भी है। कई देशों के बचाव दल खोजी कुत्तों और आधुनिक उपकरणों की मदद से जीवित लोगों का पता लगाने के काम में लगे हुए हैं। भूकंप के बाद अभी भी सैकड़ों लोग लापता हैं। यहां बचाव एवं राहत कार्य में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भूकंप में मरने वालों की संख्या 4,000 को पार कर गई है। सिर्फ काठमांडो घाटी में 1,053 लोग और सिंधुपाल चैक में 875 लोगों के मारे जाने की खबर है। अधिकारियों ने कहा कि काठमांडो और भूकंप प्रभावित कुछ दूसरे इलाकों में मलबों में अभी भी बहुत सारे लोग दबे हुए हैं। ऐसे में यह आशंका है कि मृतकों की संख्या 7,000 के पार जा सकती है।अधिकारियों और सहायता एजेंसियों ने सचेत किया है कि पश्चिमी नेपाल के दूर-दराज वाले पहाड़ी इलाकों में बचाव दलों के पहुंचने के बाद हताहतों की संख्या में और इजाफा दिख सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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