रिटेल में एफडीआई पर मोदी सरकार ने बड़ा यू-टर्न लिया है। बीजेपी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मल्टी ब्रैंड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई के यूपीए सरकार के निर्णय को बरकरार रखा है। खास बात यह है कि बीजेपी ने मल्टी ब्रैंड रिटेल में विदेशी निवेश का पहले विरोध किया था और अब इसे ही बरकरार रहने दिया है। मंगलवार को औद्योगिक नीति एवं प्रोत्साहन (डीआईपीपी) विभाग ने एफडीआई पर एक दस्तावेज जारी किया जिसमें मल्टी ब्रैंड रिटेल में विदेशी निवेश को बरकरार रखने का फैसला लिया गया है। इस दस्तावेज में वे सभी बदलाव शामिल हैं जो बीते सालों में भारत की एफडीआई पॉलिसी में किए गए हैं। उन बदलावों में रेलवे, रक्षा, चिकित्सा उपकरण, बीमा एवं निर्माण में दी गई छूट को भी शामिल किया गया है। यह दस्तावेज 119 पृष्ठों पर आधारित हैं जिसमें निवेशकों के लिए पॉलिसी को सरल बनाया गया है। गौरतलब है कि डीआईपीपी एफडीआई पॉलिसी की नोडल एजेंसी है। रक्षा क्षेत्र में एफडीआई को 26 फीसदी से बढ़ाकर 49 फीसदी किया गया है। यह कुछ चनिंदा मामलों में 100 फीसदी भी हो सकता है। एफडीआई पॉलिसी में होने वाले बदलाव को पहले प्रेस नोट्स के जरिए सूचित किया जाता था। यूपीए सरकार ने एक साल में दो बार इन बदलावों को एक दस्तावेज में पेश करने की परंपरा शुरू की। नई एनडीए सरकार द्वारा जारी किया गया यह पहला दस्तावेज है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।