कहते हैं कानून सभी को समान नजरों से देखता है..उसके लिए सभी बराबर हैं.लेकिन जब पुलिस ही आपस में जाती-बिरादरी में बंट जाए तो आप इसे क्या कहेंगे.बिहार के गया पुलिस लाईन की तस्वीर कुछ ऐसी ही है। चूल्हे में चढ़ी कढ़ायी और उस पर तैयार हो रहा खाना, पुलिस के जवानों के लिए है...ये आलम है गया की पुलिस लाइन का...जहां सैंकड़ों कानून के रखवालों के लिए खाना बन रहा है...खाना बनाने के लिए रसोई भी कई हैं...रसोई की संख्या यहां इसलिए ज्यादा नहीं है कि यहां जवानों की संख्या अधिक है बल्कि इसलिए है कि यहां जातिप्रथा का सांप अपना फन फैलाए हुए बैठा है... बावर्चियों के मुताबिक यहां पर पंडितों की रसोई है तो कहीं राजपूतों का अलग चूल्हा जल रहा है. और ऐसे ही ये पुलिस लाईन जात-पात और ऊंच-नीच के नाम पर बंटी है...वहीं इस गंभीर मुद्दे पर पुलिस के आलाधिकारी भी कुछ नहीं बोलते। ऐसे में बिहार के गया जिले की ये पुलिस लाईन समाज को क्या संदेश दे रही है...ये आप जान सकते हैं...अगर कानून के रखवाले ही आपस में जात-पात, बिरादरी में बंटे रहेंगे तो उनसे समान न्याय की आस क्या कर सकते हैं. ये महज कानून के साथ मजाक ही नहीं बल्कि समाज में एक काला धब्बा है. जिसे न तो मिटाने की कोशिश हो रही है न ही इसे साफ करने की कोई मुहीम।
Author: JAN TV Editorial Team
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