(India)
निदेशालय को पता चला है कि कुछ आयतक मनी लॉन्ड्रिंग के लिए अनूठा तरीका अपना रहे हैं जिसमें वे जाली बिल जमा कराकर अपने विदेशी विशेषकर हांगकांग स्थित बैंक खातों में धन प्राप्त करते हैं। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार महीनों की जांच के बाद डीआरआई ने दावा किया कि कुछ व्यापारियों ने ऐसी खेपों की आयात के बिल पेश जो भारतीय तटों पर कभी पहुंचे ही नहीं। इससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। डीआरआई ने इस व्यापार आधारित मनी लॉन्ड्रिंग (टीबीएमएल) तथा विदेश में धन के अवैध हस्तांतरण के बारे में भारतीय रिजर्व बैंक को सतर्क किया। यह अब अधिक देखने को मिल रहा है। सूत्रों ने कहा, ऐसा संदेह है कि बड़ी कंपनियां भी टीबीएमएल में संलिप्त हैं। एजेंसी करोड़ों रुपये मूल्य के मामलों की जांच कर रही है। गुप्तचर सूचनाओं के आधार पर डीआरआई ने एक जांच शुरू की थी जिसमें पाया गया कि कि आयातक बैंकों को जाली आयात दस्तावेज व अन्य नकली बिल जमा कर रहे हैं ताकि बार बार विदेशी मुद्रा हासिल की जा सके।
Author: JAN TV Editorial Team
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