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इस विमान त्रासदी में इसमें सवार 298 लोगों की मौत हो गई। मलेशियाई प्रधानमंत्री नजीब रजाक ने शुक्रवार को मांग की है कि साजिशकर्ताओं को जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। नजीब ने आज कहा कि मलेशिया के लिए पहले से त्रासद रहे इस वर्ष का यह एक त्रासद दिन है। विमान में सवार यात्री कई देशों के थे लेकिन दुख की इस घड़ी में हम सब एकसाथ हैं। बोइंग 777 नामक इस विमान ने अम्सटर्डम से कुआलालंपुर के लिए उड़ान भरी थी और इसने किसी विपत्ति में होने की कोई जानकारी भी नहीं दी। यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या मलेशियाई एयरलाइन्स के विमान एमएच 17 को कल जानबूझकर निशाना बनाया गया था या फिर ऐसा गलती से हुआ? नजीब ने कहा कि इसकी तत्काल जांच शुरू की जाएगी। नजीब ने एक संवाददाता सम्मेलन में संवाददाताओं को मलेशिया की सरकार द्वारा कीव भेजे जाने वाले विशेष विमान की भी जानकारी दी। इस विमान में मलेशिया का विशेष आपदा सहायता और बचाव दल और एक चिकित्सीय दल है। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी अधिकारियों का मानना है कि विमान पर रूसी समर्थक विद्रोहियों ने प्रहार किया है लेकिन मलेशिया इस समय इस बात की पुष्टि नहीं कर सकता। नजीब ने कहा कि यदि यह पता चलता है कि विमान पर हमला ही बोला गया था, तो हम जोर देते हैं कि साजिशकर्ताओं को न्याय के कटघरे में जल्दी से जल्दी लाया जाए। नजीब ने कहा कि उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति पोरोशेंको से बातचीत की, जिन्होंने इस पूरी घटना की पूर्ण जांच का संकल्प लिया। एक बयान में मलेशियाई एयरलाइंस ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय वायु यातायात संघ ने कहा है कि जिस वायुसीमा में विमान एमएच 17 यात्रा कर रहा था, वह प्रतिबंध के दायरे में नहीं आता था।
विमान की उड़ान सूची दर्शाती है कि एमएच 17 में 154 नागरिक नीदरलैंड के, 43 मलेशिया के, 27 ऑस्ट्रेलिया के, 12 इंडोनेशिया के, 9 ब्रिटेन के, 4 जर्मनी के, 4 बेल्जियम के, 3 फिलीपीन्स के और एक कनाडा का नागरिक सवार था।
Author: JAN TV Editorial Team
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