संसद, कार्यपालिका को न्यायपालिका में दखल नहीं देना चाहिए: सीजेआई आरएम लोढ़ा
(DELHI, India) न्यायमूर्ति लोढा ने उच्चतम न्यायालय परिसर में तिरंगा झंडा फहराने के बाद कहा कि मैं आश्वस्त हूं कि न्यायपालिका, कार्यपालिका और संसद में लोग इतने परिपक्व हैं कि वे एक दूसरे के लिए आपसी सम्मान रखें और सुनिश्चित करें कि ये सभी (संस्थाएं) अपने क्षेत्रों में किसी बाहरी दबाव के बगैर काम कर पाएं। उन्होंने कहा कि हमारे संविधान निर्माताओं ने यह सुनिश्चित किया है कि राज्य के सभी अंग दूसरे के अधिकार क्षेत्र में अतिक्रमण किये बगैर अपने अपने क्षेत्रों में काम करें। न्यायपालिका की आपत्ति के बावजूद, संसद ने गुरुवार को ऐसे दो विधेयकों को मंजूरी दी थी जो दो दशक से अधिक समय पुरानी कालेजियम व्यवस्था को खत्म करके उच्च न्यायपालिका में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नए तंत्र की व्यवस्था करते हैं। न्यायिक प्रणाली में देरी को लेकर होने वाली आलोचनाओं के संदर्भ में, न्यायमूर्ति लोढा ने कहा कि जहां न्यायपालिका (उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के) एक हजार से भी कम न्यायाधीशों की नियुक्ति करने की जिम्मेदार है, वहीं राज्य सरकारें निचली अदालतों में 19 हजार न्यायाधीशों की नियुक्तियां करती हैं। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के प्रमुख के तौर पर, जब मैं पाता हूं कि आपराधिक न्याय प्रणाली ने काफी परेशानियां, दर्द, मानवाधिकार का हनन किया और मानव स्वतंत्रता से वंचित रखा तो मेरा हृदय पीड़ा महसूस करता है। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि जेलों में ज्यादातर विचाराधीन कैदी हैं। उन्होंने कहा कि यह दुख की बात है कि जेलों में बंद कैदियों में दोषियों से ज्यादातर विचाराधीन कैदी हैं। उन्होंने कहा कि केंद्रीय कारागारों में 50 प्रतिशत से अधिक विचाराधीन कैदी हैं और जिला कारागारों में यह आंकड़ा 72 प्रतिशत से भी अधिक है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित समारोह में मौजूद केन्द्रीय विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि न्यायपालिका की पवित्रता और स्वतंत्रता सर्वोपरि है।

Author: JAN TV Editorial Team

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