एम्स में भ्रष्टाचार के कई खुलासे करने वाले मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) संजीव चतुर्वेदी को हटाने पर विवाद गहराता जा रहा है। अपने खिलाफ हुए इस व्यवहार का जिक्र करते हुए संजीव चतुर्वेदी ने पीएम को चिट्ठी लिखकर आरोप लगाया है कि उन्हें एक बीजेपी नेता के कहने पर हटाया गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने पर उन्हें ये सजा दी गई है। संजीव की नियुक्ति एम्स में सीवीओ के रूप में जून, 2012 से जून, 2016 तक के लिए की गई थी। खास बात यह है कि निश्चित अवधि से दो साल पहले ही संजीव को हटाने का आदेश खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने दिया है। डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि संजीव चतुर्वेदी इस पद के लिए योग्य नहीं थे क्योंकि उनकी नियुक्ति सीवीसी की अनुमति के बगैर हुई थी। जब ये मामला हमारे संज्ञान में आया तो हमने तुरंत एक्शन लेते हुए उन्हें हटाने का फैसला लिया। चतुर्वेदी को इसी साल स्वास्थ्य सचिव से ईमानदार अधिकारी का तमगा मिला था। चतुर्वेदी के सर्विस रिकाॅर्ड पर नजर डाले तो पता चलता है कि पांच साल में उनका 12 बार ट्रांसफर, आधा दर्जन झूठे पुलिस मुकदमे और निलंबन के बाद राष्ट्रपति के यहां से चार बार बहाली।
Author: JAN TV Editorial Team
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