(DELHI, India)
प्रधान न्यायाधीश आर एम लोढा के नेतृत्व वाली पीठ ने बिजली उत्पादक कंपनियों की उस याचिका को अस्वीकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि अगर शीर्ष अदालत आवंटन रद्द करने का फैसला करती है तब उनकी बात फिर से सुनी जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने 9 सितंबर को इस मामले में तब अपना आदेश सुरक्षित रखा था जब केंद्र ने इन्हें रद्द करने की वकालत की थी जबकि आवंटियों ने अनियमितता के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया और प्रत्येक आवंटन पर विचार के लिए एक समिति गठित करने की मांग की थी। कोयला उत्पादक संघ, स्पंज आयरन उत्पादक संघ और भारतीय स्वतंत्र बिजली उत्पादक संघ के साथ कुछ निजी निकायों ने शीर्ष अदालत के 25 अगस्त के निर्णय के परिणामों पर विचार के लिए एक समिति के गठन का पक्ष नहीं लेने के सरकार के रूख का विरोध किया था । इन्होंने सरकार के इस रूख की आलोचना की थी कि कोयला ब्लाक आवंटन को रद्द करना, फैसले का नैसर्गिक परिणाम है। इनका कहना है कि ऐसा कहना आपदा की स्थिति पैदा करेगी और इससे लोगों एवं ग्रामीण आबादी प्रभावित होगी जो पहले से बिजली संकट का सामना कर रही है। पीठ ने हालांकि कहा कि सरकार ने केवल अपनी स्थिति स्पष्ट की है और यह मामले से निपटने के लिए उचित मार्ग नहीं होगा क्योंकि स्क्रीनिंग समिति कह चुकी है कि किसी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
Author: JAN TV Editorial Team
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