रक्षा खरीद में पिछली सरकार की नीतियों में बड़ा फेरबदल करते हुए राजग सरकार ने सैन्य सौदों में विदेशी कंपनियों के एजेंटों के लिए दरवाजे खोलने की तैयारी कर ली है। साथ ही रक्षा मंत्रलय बीते कुछ समय में विभिन्न घोटालों व आरोपों के मद्देनजर काली सूची में डाली गई कंपनियों के मामलों की भी समीक्षा कर रहा है। पाबंदी के बाद टाट्रा ट्रकों के कलपुर्जो की किल्लत के मद्देनजर टाट्रा कंपनी से आंशिक प्रतिबंध हटाते हुए खरीद का गलियारा खोला गया है। रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर ने भारतीय सेनाओं की जरूरतों का हवाला देते हुए इन व्यावहारिक बदलावों पर जोर दिया है। रक्षा मंत्री ने प्रस्तावित बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी कंपनियां खरीद सौदों में मदद के लिए तकनीकी प्रतिनिधि रख सकेंगी, लेकिन कंपनियों को न केवल इन प्रतिनिधियों की जानकारी मंत्रालय को देनी होंगी बल्कि शर्त होगी सौदे के लिए ऐसे एजेंटों को किसी तरह का हिस्सा या सक्सेस मनी नहीं दिया जाए। रक्षा मंत्री ने कहा कि कंपनियों को ऐसे प्रतिनिधियों की फीस का खुलासा भी सौदे से पहले ही करना पड़ेगा। ऐसे मध्यस्थों की भागीदारी के लिए जल्द ही तैयार हो रही रक्षा खरीद नीति डीपीपी-2015 में प्रावधान किए जाएंगे। हालांकि पारदर्शिता बढ़ाने के साथ भ्रष्टाचार के गलियारे बंद करने की कड़ी में रक्षा मंत्रलय इसके लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग के साथ भी संपर्क में है।
Author: JAN TV Editorial Team
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