इंडियन कार इंडस्ट्री में 11 साल के अंतराल के बाद 2013 में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई है। 2013 में कार सेल्स 10 फीसदी घटकर 18.07 लाख यूनिट्स रही। ज्यादा महंगाई दर और बढ़ते फ्यूल प्राइसेज के बीच फिलहाल इकनॉमिक रिकवरी के संकेत नहीं दिख रहे हैं। कंज्यूमर डिमांड और देश की खराब मैक्रो-इकनॉमिक कंडीशन का इंडिकेटर मानी जाने वाली कार सेल्स 2013 में सुस्त रही। 2012 के मुकाबले 2013 में 1,91,692 गाड़ियां कम बिकीं। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल्स मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के मुताबिक पिछले साल डोमेस्टिक कार सेल्स घटकर 18,07,011 यूनिट्स रही, जबकि इससे साल भर पहले यह 19,98,703 यूनिट्स थी। अगस्त 2012 के बाद से पिछले 17 में से 14 महीने में कार सेल्स नेगेटिव रही है। सियाम का कहना है कि हालात कुछ समय तक ऐसे ही रह सकते हैं। इसके डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर ने बताया, श्इंडस्ट्री के लिए यह सबसे बुरे दौर में से एक है। 2002 के बाद पहली बार 2013 में एनुअल कार सेल्स में गिरावट दर्ज की गई है। महंगाई अब भी सितम ढा रही है। पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ रहे हैं। इकनॉमिक स्लोडाउन के दौर में लोन महंगा होने से इंडस्ट्री पर दोहरी मार पड़ी है।श्
Author: JAN TV Editorial Team
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